राजा टोडरमल से सीखे प्रबंधन और प्रोफेशन :
राजा टोडरमल से सीखे प्रबंधन और प्रोफेशन :
किसी टास्क पर फोकस होने पर व्यक्ति किस तरह से मगन हो जाता है ये राजा टोडरमल की माता ने बताया था। राजा टोडरमल एक ग्रन्थ लिख रहे थे जिसका नाम था "मोक्षमार्ग" | राजा साहब इस ग्रन्थ को लिखने में इतने खो गए थे की रात दिन एक कर दिया था। लंबे अंतराल के बाद एक दिन वह अपनी मां के साथ भोजन करने बैठे। मां ने बड़े प्रेम से टोडरमल को सब्जी परोसी, चपातियां दीं। टोडरमल ने एक टुकड़ा खाया, दूसरा टुकड़ा खाया और वह अचानक रुक गए। मां ने पूछा, ‘बेटा! क्या बात है? क्या आज तुम्हें सब्जी अच्छी नहीं लग रही है?’ टोडरमल ने सहजता से जवाब दिया, ‘नहीं मां, ऐसी बात नहीं है। मुझे लग रहा है कि आज आप सब्जी में नमक डालना भूल गई हैं।’ माँ ने आश्चर्य चकित होकर पूछा क्या तेरा ग्रन्थ पूरा हो गया है। टोडरमल बोले हां पर माँ तुझे कैसे अंदाजा लगा। माँ ने बड़े प्यार से बोली की मै जानबूझकर तेरे भोजन में नमक नहीं डाल रही थी ताकि इस बहाने तुझ से बात करने का मौका मिले। लेकिन तुझे इतने समय तक ध्यान ही नहीं आया की सब्जी कैसी बन रही है। सच ही कहा गया है, किसी भी काम को पूरी लगन से करना चाहिए, सफलता जरूर मिलती है। दुनिया में बड़े काम करने वाले महान लोगों ने ऐसी तन्मयता और लगनशीलता का परिचय देते हुए ही अपने लक्ष्य को हासिल किया है।
राजा टोडरमल एक अच्छे अर्थशास्त्री और टीम और सेना के नायक थे उनको मुग़ल राजा अख़बार ने नौ रत्नो में शामिल किया था। साथ ही अख़बार ने उनको वजीर भी बनाया। इनके काम करने के चर्चे दूर तक फैले.इनकी खूबियों के कारण ही अकबर ने इन्हें अपने दरबार में नवरत्न बनाने का फैसला लिया। पहले इन्हें मुगलों की राजधानी आगरा का प्रभारी बनाया गया। इसके बाद गुजरात का गवर्नर और बंगाल में बनी अकबर की टकसाल के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी | यहां भी टोडरमल ने काम करने के तरीके ने बादशाह अकबर का दिल जीत लिया। यहाँ ये गौर करने वाली बात है की राजा टोडरमल ने जहा अखबर के साथ काम किया और इनके पास राजकोष से लेकर धन के विवरण से जुड़ी कई जिम्मेदारियां थीं। टोडरमल का चुनाव अकबर के लिए फायदेमंद रहा। उन्होंने मुगलों के राजकोष में इजाफा किया और उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे। फिर उन्होंने अपने करियर में डाइवर्सिफिकेशन लिया और सेनापति के रूप में उनको शुरुआत में इन्हें शेरशाह सूरी की सल्तनत में काम मौका मिला. पंजाब के रोहतास किले के निर्माण के दौरान इन्हें इसकी व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी दी गई। सूरी के साम्राज्य में मंत्री और सेनापति की जिम्मेदारी भी निभाई। इसके बाद टोडरमल को यह जिम्मेदारी मिली कि कैसे वो उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में मुगलों के लिए बाधाएं पैदा करें ताकि उनके वो अपना दायरा न बढ़ा सकें। मुगलों के दुश्मन रहे शेरशाह सूरी के साथ टोडरमल ने लम्बे समय तक काम किया | मल्टीटास्किंग में राजा टोडरमल को एक उदहारण पेश किया था वित्त प्रबंधन ,सेना का प्रबंधन,एक कुशल रणनीतिकार,कुशल अर्थशास्त्री ,कुशल सलाहकार जैसे महत्वपूर्ण रोल में राजा ने अपने आप को प्रूव किया जो एक साधारण परिवार से आये थे और कम उम्र में ही पिता का देहांत होने से पुरे घर की जिम्मेदारी निभाने के साथ एक सक्सेसफुल लीडर और प्रसाशनिक अधिकारी की भूमिका को बखूबी निभाया। प्रबंधन के विधार्थियो के लिए राजा टोडरमल हमेशा के मिशाल रहेंगे। नई पीढ़ी की शिक्चा में राजा टोडरमल को जरूर शामिल करना चाहिए।
डॉ राजेश भंडारी
अस्सिस्टेंट प्रोफेसर

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